UP Board Class 12 Gyansindhu General Hindi Question Bank 2026 [Page -24]

UP Board Class 12 Question Bank 2026 : Gyansindhu Pariksha Prahar General Hindi सामान्य हिंदी की क्वेश्चन बैंक 2026 (Full Book – PAGE-24

हम और हमारा आदर्श (तेजस्वी मन के सम्पादित अंश-1)

1.  डॉ0 0 पी0 जे0 अब्दुल कलाम (1) जो कुछ भी हम संसार में देखते हैं वह ऊर्जा का ही स्वरूप है। जैसा कि महर्षि अरविन्द ने कहा है कि हम भी ऊर्जा के ही अंश हैं। इसलिए जब हमने यह जान लिया है कि आत्मा और पदार्थ दोनों ही अस्तित्व का हिस्सा हैं, वे एक-दूसरे से पूरा तादात्म्य रखे हुए हैं तो हमें यह एहसास भी होगा कि भौतिक पदार्थों की इच्छा रखना किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक या गैर-आध्यात्मिक बात नहीं है

उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

उत्तर-    संदर्भ- प्रस्तुत गद्यांश डॉ0 ए0पी0जे0 कलाम द्वारा लिखित ‘तेजस्वी मन के संपादित अंश’ के ‘हम और हमारा आदर्श’ नामक पाठ से उद्धृत है।

  1. महर्षि अरविन्द ने क्या कहा है?

उत्तर –   महर्षि अरविन्द ने कहा है कि हम भी ऊर्जा के अंश है।

  1. हम इस संसार में जो कुछ देखते हैं वह क्या है?

उत्तर –   हम इस संसार में जो कुछ देखते हैं, वह ऊर्जा का ही स्वरूप है।

  1. अस्तित्व’ और ‘तादात्म्य’ शब्दों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर –   अस्तित्व- होना, मौजूदगी। तादात्म्य – तल्लीनता/एक हो जाना।

  1. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-    कलाम जी भौतिकता और अध्यात्मिकता को न तो एक दूसरे का विरोधी मानते हैं न ही भौतिक मानसिकता को गलत। आत्मा व पदार्थ सभी का अस्तित्व है, दोनों परस्पर जुड़े हुए हैं अतः भौतिकता कोई बुरी चीज नहीं है।

  1. उपर्युक्त गद्यांश के पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।

उत्तर-    उपर्युक्त

  1. जो कुछ भी हम इस संसार में देखते हैं वह किसका स्वरूप है?

उत्तर-    जो कुछ भी इस संसार में देखते हैं, वह ऊर्जा का स्वरूप है।

  1. महर्षि अरविन्द ने अस्तित्व का हिस्सा किसको माना हैं?

उत्तर-    महर्षि अरविन्द ने आत्मा और पदार्थ दोनों को अस्तित्व का हिस्सा माना हैं।

  1. कैसी इच्छा रखना शर्मनाक या गैर-आध्यात्मिक बात नहीं है?

उत्तर-    भौतिक पदार्थों की इच्छा रखना शर्मनाक या गैर-आध्यात्मिक बात नहीं है।

  1. कौन एक-दूसरे से पूरा तादात्म्य रखे हुए हैं?

उत्तर- आत्मा और पदार्थ दोनों ही एक-दूसरे से पूरा तादात्म्य रखे हुए हैं।

  1. प्रस्तुत गद्यांश की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।

उत्तर- भाषा सरल व परिष्कृत खड़ीबोली तथा शैली वर्णनात्मक एवं विवेचनात्मक।

(2)       मैं यह नहीं मानता कि समृद्धि और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी हैं या भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच है। उदाहरण के तौर पर, मैं खुद न्यूनतम वस्तुओं का भोग करते हुए जीवन बिता रहा हूँ, लेकिन मैं सर्वत्र समृद्धि की कद्र करता हूँ, क्योंकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विष्वास लाती है, जो अन्ततः हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक हैं। आप अपने आसपास देखेंगे तो पाएँगे कि खुद प्रकृति भी कोई काम आधे-अधूरे मन से नहीं करती। किसी बगीचे में जाइए। मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी। अथवा ऊपर की तरफ ही देखें, यह ब्रह्माण्ड आपको अनंत तक फैला दिखाई देगा, आपके यकीन से भी परे।

  1. समृद्धि और अध्यात्म के सम्बन्ध में लेखक क्या नहीं मानता?

उत्तर-    लेखक यह नहीं मानता कि समृद्धि और अध्यात्म एक दूसरे के विरोधी हैं या भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच है।

  1. समृद्धि अपने साथ क्या लाती है?

उत्तर-    समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विष्वास लाती है।

  1. न्यूनतम’ और ‘अनन्त’ का क्या अर्थ है?

उत्तर-    न्यूनतम का अर्थ कम से कम तथा अनन्त का अर्थ जिसका कोई अंत न हो।

  1. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-    कलाम जी कहते हैं कि आप अपने आस-पास देखें तो आपको ऐसे प्रकृति के बहुत-से उदाहरण मिल जाएँगे जो कि पूर्ण होते दिखेंगे यानी प्रकृति अपने किसी भी काम को अधूरे मन से नहीं करती। आप किसी फूलों के बाग में ही पहुँच जाइए; वहाँ मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी, क्योंकि मौसम ने अपने काम को अधूरा नहीं छोड़ा। या फिर आप अपने ऊपर की ओर ही देखें तो आपको यह ब्रह्माण्ड इस तरह विस्तृत दिखाई देगा जिसका कोई अन्त नहीं है, जहाँ तक आप सोच भी नहीं सकते अर्थात् यह नभ भी हमें विस्तृत होने का यानी पूर्णता का सन्देश देता है।

  1. गद्यांश से सम्बन्धित पाठ का शीर्षक और उसके लेखक का नाम लिखिए।

उत्तर-    उपर्युक्त

  1. प्रस्तुत गद्यांश की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।

उत्तर-    भाषा सरल व परिष्कृत खड़ीबोली तथा शैली वर्णनात्मक एवं विवेचनात्मक।

  1. लेखक किनको एक-दूसरे का विरोधी नहीं मानता?

उत्तर-    लेखक समृद्धि और अध्यात्म को एक-दूसरे का विरोधी नहीं मानता।

  1. डॉ0 कलाम समृद्धि की कद्र क्यों करते हैं?

उत्तर-    डॉ0 कलाम समृद्धि की कद्र इसलिए करते हैं, क्योकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विष्वास लाती है, जो अन्ततः हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक है।

  1. लेखक ने किस स्थिति में अपना जीवन व्यतीत किया?

उत्तर-    लेखक ने न्यूनतम वस्तुओं का भोग करते हुए अपना जीवन व्यतीत किया।

  1. समृद्धि अन्ततः किसे बनाए रखने में सहायक है?

उत्तर-    समृद्धि अन्ततः हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक हैं।

  1. समद्धि से हमें क्या लाभ होता है?

उत्तर-    समृद्धि से हमें यह लाभ है कि यह सुरक्षा और विश्वास लाती है, जिससे हमारी आजादी भी बनी रहती है।

  1. प्रकृति का कोई कम पूर्ण मनोयोग से होता है, इसका आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-    प्रकृति का कोई काम पूर्ण मनोयोग से होता है, इसका आशय यह है कि प्रकृति अपने किसी भी काम में किसी प्रकार का कोई आलस्य या पक्षपात नहीं करती है।

  1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने छात्रों को क्या संदेश दिया है?

उत्तर-    प्रस्तुत गद्यांश के माध्यम से लेखक ने छात्रों को प्रगति करने के लिए किसी भी कार्य को पूर्ण करके ही चैन लेने का सन्देश दिया है।

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