UP Board Class 12 Gyansindhu General Hindi Question Bank 2026 [Page -25]

UP Board Class 12 Question Bank 2026 : Gyansindhu Pariksha Prahar General Hindi सामान्य हिंदी की क्वेश्चन बैंक 2026 (Full Book – PAGE-25

हम और हमारा आदर्श (तेजस्वी मन के सम्पादित अंश-2)

(3)       मैं खासतौर से युवा छात्रों से ही क्यों मिलता हूँ? इस सवाल का जवाब तलाशते हुए मैं अपने छात्र-जीवन के दिनों के बारे में सोचने लगा। रामेष्वरम् के द्वीप से बाहर निकल कर यह कितनी लम्बी यात्रा रही। पीछे मुड़कर देखता हूँ तो विष्वास नहीं होता। आखिर वह क्या था जिसके कारण यह संभव हो सका? महत्वाकांक्षा? कई बातें मेरे दिमाग में आती हैं। मेरा ख्याल है कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि मैंने अपने योगदान के मुताबिक ही अपना मूल्य आँका। बुनियादी बात जो आपको समझनी चाहिए वह यह है कि आप जीवन की अच्छी चीजों को पाने का हक रखते हैं, उनका जो ईष्वर की दी हुई है। जब तक हमारे विद्यार्थियों और युवाओं को यह भरोसा नहीं होगा कि वे विकसित भारत के नागरिक बनने के योग्य हैं तब तक वे जिम्मेदार और ज्ञानवान् नागरिक भी कैसे बन सकेंगे।

  1. लेखक अपने छात्र जीवन के विषय में क्यों सोचने लगता है?

उत्तर-    लेखक को युवा छात्रों से मिलना, उनसे बातें करना अत्यधिक रुचिकर लगता था। वह स्वयं की युवा छात्रों से मिलने की प्रवृत्ति पर प्रश्न अंकित करता है कि उसे यह क्यों अच्छा लगता है? और इसी प्रश्न का उत्तर ढूंढते हुए वह अपने छात्र जीवन के विषय में सोचने लगता है।

  1. लेखक के अनुसार मनुष्य जीवन में बड़ा बनने का मूल कारण क्या है?

उत्तर-    कलाम जी के अनुसार, मनुष्य का जीवन में बड़ा बनने का मूल कारण उसकी महत्त्वाकांक्षा है। मनुष्य महत्त्वाकांक्षा के बल पर ही अपने जीवन में आगे बढ़ पाता है।

  1. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-    रेखांकित अंश की व्याख्या-  डॉ0 कलाम ने रेखांकित अंश के माध्यम से भारतीय युवाओं को यह बताना चाहा है कि जब तक उन्हें यह विश्वास नहीं होगा कि देश के नागरिक बनने की सम्पूर्ण योग्यता स्वयं में रखते हैं तब तक वे एक जिम्मेदार और ज्ञानवान नागरिक नहीं बन सकते अर्थात् जब तक व्यक्ति को अपनी कीमत का आकलन नहीं होगा तब तक वह महत्त्वपूर्ण कार्य नहीं कर सकता।

  1. किसी राष्ट्र के युवा कब तक राष्ट्र की उन्नति में अपनी भूमिका नहीं निभा सकते?

उत्तर-    किसी राष्ट्र के नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं व विद्यार्थियों में जब तक यह विश्वास नहीं होगा कि वे स्वयं विकसित राष्ट्र के नागरिक बनने के योग्य हैं, तब तक वे राष्ट्र के विकास एवं उन्नति में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा सकते, क्योंकि राष्ट्र के विकास के लिए उन्हें स्वयं जिम्मेदारियों को उठाते हुए अपना योगदान देना होगा।

  1. लेखक के अनुसार विकसित देशों की समृद्धि के पीछे क्या तथ्य है?

उत्तर-    लेखक के अनुसार विकसित देशों की समृद्धि के पीछे कोई रहस्य नहीं छिपा, अपितु इसके पीछे छिपा ऐतिहासिक तथ्य यह है कि इन देशों के नागरिक समृद्ध राष्ट्र में जीने का विश्वास रखते हैं।

  1. महत्त्वाकांक्षा एवं विद्यार्थी शब्दों का सन्धि-विच्छेद करते हुए सन्धि का नाम भी लिखिए।

उत्तर-    महत्त्व+ आकांक्षा = महत्त्वाकांक्षा (दीर्घ सन्धि)

      विद्या +अर्थी = विद्यार्थी (दीर्घ सन्धि)

  1. कलाम जी के अनुसार मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा बनने का मूल कारण क्या है?

उत्तर-    कलाम जी के अनुसार मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा बनने का मूल कारण उसकी महत्वाकांक्षा है। महत्वाकांक्षा का विशेष योगदान है।

  1. पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।

उत्तर-    उपर्युक्त

  1. प्रस्तुत गद्यांश की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।

उत्तर-    भाषा सरल व परिष्कृत खड़ीबोली तथा शैली वर्णनात्मक एवं विवेचनात्मक।

  1. डॉ00पी0जे0 अब्दुल कलाम खासतौर से किससे मिलते थे?

उत्तर-    डॉ0ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम खासतौर से देश के युवा छात्रों से मिलते थे।

  1. डॉ00पी0जे0 अब्दुल कलाम की कामयाबी के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात क्या रही?

उत्तर-    डॉ0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम की कामयाबी के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने अपने योगदान के मुताबिक ही अपने मूल्य का आकलन किया।

  1. व्यक्ति किन चीजों को पाने का हक रखता है?

उत्तर-    व्यक्ति उन सभी अच्छी चीजों को पाने का हक रखता है जो ईष्वर की दी हुई हैं।

  1. लेखक युवा छात्रों से ही क्यों मिलता है?

उत्तर-    लेखक युवा छात्रों से इसलिए मिलता है, क्योंकि वह स्वयं के छात्र-जीवन के अनुभवों एवं निष्कर्षो के समान यह आवश्यक मानता है कि छात्र जीवन में ही विद्यार्थियों में वांछित गुणों, योग्यताओं एवं क्षमताओं को विकसित कर उन्हें विकसित भारत का उत्तरदायी व ज्ञानवान नागरिक बनाया जा सकता है।

  1. उक्त पंक्तियों से आपको क्या प्रेरणा मिलती है ?

उत्तर-    हमें यह प्रेरणा प्राप्त होती है कि हम अपने योगदान के अनुरूप ही अपना मूल्यांकन करना सीखें और इस आधारभूत बात को भली-भाँति समझें कि हम ईष्वर प्रदत्त जीवन की समस्त अच्छी वस्तुओं को प्राप्त करने के समान रूप से अधिकारी है।

(4)       विकसित देशों की समृद्धि के पीछे कोई रहस्य नहीं छिपा है। ऐतिहासिक तथ्य बस इतना है कि इन राष्ट्रों- जिन्हें जी-8 के नाम से है- के लोगों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस विष्वास को पुख्ता किया कि मजबूत और समृद्ध देश में उन्हें अच्छा जीवन बिताना है। तब सच्चाई उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप हल गयी।

  1. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-    रेखांकित अंश की व्याख्या- डॉ0 कलाम कहते हैं कि जी-8 के अन्तर्गत आने वाले विकसित देशों की समृद्धि के पीछे कोई रहस्य नहीं छिपा है। विकसित देशों के विकास एवं समृद्धि के पीछे केवल यही ऐतिहासिक तथ्य है कि इन लोगों की प्रत्येक पीढ़ियाँ अपने इस विष्वास को पुख्ता किया हमें मजबूत और समृद्ध देश में अच्छा जीवन बिताना है। इस देश के लोग अच्छे जीवन व्यतीत करने के लिए कठोर परिश्रम किये। यही सच्चाई है कि उन्होंने अपनी आकांक्षाओं के अनुरूप अपने को ढाला।

  1. जी-8 के देशों के लोगों ने किस विष्वास को मजबूत किया।

उत्तर-    जी-8 के देशों ने इस विष्वास को मजबूत किया कि हमें समृद्ध देश में अच्छा जीवन बिताना है।

  1. जी-8 के नाम से किसे पुकारा जाता है?

उत्तर-    जी-8 के सदस्य देश हैं- फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूनाइटेड किंगडम, जापान, यूनाइटेड स्टेट, कनाडा और रूस।

  1. किसकी समृद्धि के पीछे कोई रहस्य नहीं छिपा है?

उत्तर-    जी-8 देशों की समृद्धि के पीछे कोई रहस्य नहीं छिपा है।

  1. प्रस्तुत गद्यांश की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।

उत्तर-    भाषा सरल व परिष्कृत खड़ीबोली तथा शैली वर्णनात्मक एवं विवेचनात्मक।

(5)       इसके बावजूद अकसर हमें यही विष्वास दिलाया जाता है। न्यूनतम में गुजारा करने और जीवन बिताने में भी निश्चित रूप से कोई हर्ज नहीं है। महात्मा गांधी ने ऐसा ही जीवन जिया था, लेकिन जैसा कि उनके साथ था, आपके मामले में भी यह आपकी पसन्द पर निर्भर करता है। आपकी ऐसी जीवन शैली इसलिए है; क्योंकि इससे वे तमाम जरूरतें पूरी होती हैं, जो आपके भीतर की गहराइयों से उपजी होती हैं। लेकिन त्याग की प्रतिमूर्ति बनाना और जोर-जबरदस्ती से चुनना-सहने का गुणगान करना-अलग बातें हैं। हमारी युवा शक्ति से सम्पर्क कायम करने के मेरे फैसले का आधार भी यहीं रहा है। उनके सपनों को जानना और उन्हें बताना कि अच्छे, भरे-पूरे और सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन के सपने देखना तथा फिर उस स्वर्णिम युग के लिए काम करना सही है।

  1. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-    डॉ0 कलाम कहते हैं कि अपने आध्यात्मिक उत्थान के लिए सुख-साधनों का त्याग करना ही पड़ेगा। यह ठीक है कि सुख-साधनों को त्यागकर न्यूनतम में गुजारा करने में कोई हानि नहीं है। महात्मा गांधी ने स्वयं न्यूनतम के साथ जीवन जिया था।

  1. किस प्रकार का जीवन बिताने में हर्ज नहीं है?

उत्तर-    न्यूनतम में गुजारा करने और जीवन बिताने में कोई हर्ज नहीं है।

  1. हमारे युवाओं के फैसले का क्या आधार है?

उत्तर-    लेखक के युवाओं से सम्पर्क कायम करने के फैसले का आधार यही रहा है कि उन्हें कोई बलपूर्वक अभावग्रस्त जीवन जीने के लिए विवश न करे। यदि वे स्वेच्छा से न्यूनतम में गुजारा करके जीवन बिताने के लिए तैयार हैं, तब तो ठीक है; अन्यथा उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन व्यतीत करते हुए अपने सपनों को साकार करने के लिए उनको प्रेरित करना उनके फैसले का एकमात्र आधार है।

  1. सपनों को पूरा करने के लिए क्या करना उपयुक्त है?

उत्तर-    सपनों को पूरा करने के लिए उपलब्ध सुख-सुविधाओं का उपभोग करना उपयुक्त है।

  1. प्रस्तुत गद्यांश की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।

उत्तर-    भाषा सरल व परिष्कृत खड़ीबोली तथा शैली वर्णनात्मक एवं विवेचनात्मक।

  1. उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

उत्तर-    उपर्युक्त

 

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