UP Board Class 12 Gyansindhu General Hindi Question Bank 2026 [Page -35]

UP Board Class 12 Question Bank 2026 : Gyansindhu Pariksha Prahar General Hindi सामान्य हिंदी की क्वेश्चन बैंक 2026 (Full Book – PAGE-35

गीत – मैथिलीशरण 

(1)        मुझे फूल मत मारो,

            मैं अबला बाला वियोगिनी, कुछ तो दया विचारो।

            होकर मधु के मीत मदन, पटु, तुम कटु, गरल न गारो,

            मुझे विकलता, तुम्हें विफलता, ठहरो, श्रम परिहारो।

            नहीं भोगिनी यह मैं कोई, जो तुम जाल पसारो,

            बल हो तो सिन्दूर-बिन्दु यह यह हरनेत्र निहारो!

            रूप-दर्प कन्दर्प, तुम्हें तो मेरे पति पर वारो,

            लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रति के सिर पर धारो ।।

  1. उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक एवं रचयिता का नाम लिखिए।

उत्तर-    प्रस्तुत पद्यांश ‘साकेत’ महाकाव्य के नवम् सर्ग से हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित ‘गीत’ शीर्षक से उद्धृत है और इसके रचयिता ‘मैथिलीशरण गुप्त’ हैं।

  1. उर्मिला ने शिव का तीसरा नेत्र किसे बताया है?

उत्तर-    उर्मिला ने सिन्दूर-बिन्दु को शिव का तीसरा नेत्र बताया है।

  1. ‘होकर मधु के मीत मदन’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार प्रयुक्त है?

उत्तर-    ‘होकर मधु के मीत मदन’ पंक्ति में अनुप्रास अलंकार प्रयुक्त है।

  1. ‘मैं अबला बाला वियोगिनी, कुछ तो दया विचारो’ पंक्ति में कौन-सा रस प्रयुक्त है?

उत्तर-    ‘मैं अबला बाला वियोगिनी, कुछ तो दया विचारो’ में करुण रस प्रयुक्त है।

  1. रेखांकित पंक्ति की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-    रेखांकित अंश की व्याख्या-उर्मिला काम-व्यथित होने पर कामदेव से प्रार्थना करती हुई कहती है कि हे कामदेव! तुम मुझे अपने पुष्पबाणों से घायल मत करो, क्योंकि एक तो मैं अबला हूँ, दूसरे युवती हूँ और तीसरे वियोगिनी हूँ। इसलिए मेरी इस दशा को देखकर मेरे ऊपर कुछ तो दया कीजिए।

  1. मुझे फूल मत मारो में फूल का क्या तात्पर्य है?

उत्तर-    फूल का तात्पर्य है-पुष्प रूपी बाण।

  1. मदन को ‘मधु का मीत’ क्यों कहा गया?

उत्तर-    मदन को मधु का मीत इसलिए कहा गया क्योंकि बसन्त ऋतु में काम भाव अधिक सताता है।

  1. ‘सिन्दूर-बिन्दु’ से उर्मिला क्या व्यक्त करना चाहती है?

उत्तर-    ‘सिन्दूर-बिन्दु’ से उर्मिला यह कहना चाहती है कि मैं एक विवाहित महिला हूँ।

  1. कवि ने ‘अबला बाला वियोगिनी’ को किसके लिए प्रयोग किया है?

उत्तर-    कवि ने अबला बाला वियोगिनी लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला के लिए प्रयोग किया है।

  1. ‘सिन्दूर-बिन्दु’ की तुलना किससे की गयी है?

उत्तर-    सिन्दूर-बिन्दु की तुलना शिव के नेत्रों से की गयी है।

  1. चरण धूलि में कौन-सा समास है?

उत्तर-    चरण धूलि में तत्पुरुष समास है।

 

(2)        यही आता है इस मन में,

छोड़ धाम-धन जाकर मैं भी रहूँ उसी वन में।

प्रिय के व्रतं में विघ्न न डालूँ, रहूँ निकट भी दूर,

व्यथा रहे, पर साथ-साथ ही समाधान भरपूर।

हर्ष डूबा हो रोदन में, यही आता है इस मन में।

  1. पाठ का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।

उत्तर-    प्रस्तुत पाठ का शीर्षक ‘गीत’ और इसके रचनाकार (कवि) ‘मैथिलीशरण गुप्त’ हैं।

  1. मन में क्या भाव उत्पन्न हो रहा है?

उत्तर-    उर्मिला कहती है कि मेरे मन में बार-बार यही भाव जाग्रत होता है कि मैं सब धन-धाम अर्थात् राजमहल और उसके सम्पूर्ण वैभव को त्यागकर उसी प्रकार वन में जाकर रहने लगूं जिस प्रकार मेरे प्रियतम वन में रहते हैं।

  1. ‘रहूँ निकट भी दूर’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर-    रहूँ निकट भी दूर’ का अभिप्राय यह है कि मैं (उर्मिला) उनके निकट रहते हुए भी उनसे दूर नहीं रहूँगी।

  1. उपर्युक्त कविता में कौन-सा अलंकार है?

उत्तर-    प्रस्तुत कविता में काव्यलिंग एवं अनुप्रास अलंकार है।

  1. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-    रेखांकित अंश की व्याख्या-उर्मिला कहती है कि मेरे मन में यही आता है कि मैं अपने प्रियतम के दर्शन करके आनन्दित होती रहूँ और उनसे प्रत्यक्ष नै मिल पाने के कारण निरन्तर विलाप भी करती रहूँ।

  1. उपर्युक्त पद्यांश में कौन-सा रस प्रयुक्त हुआ है?

उत्तर-    उपर्युक्त पद्यांश में प्रयुक्त रस वियोग श्रृंगार है।

  1. उपर्युक्त पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य लिखिए।

उत्तर-    काव्य सौन्दर्यः भाषा शुद्ध परिष्कृत खड़ी बोली। शैली- मुक्तक। छन्द-गेय पद। गुण- माधुर्य शब्द-शक्ति- अभिधा।

 

(3)       निरख सखी, ये खंजन आये,

फेरे उन मेरे रंजन ने नयन इधर मन भाये।

फैला उनके तन का आतप, मन से सर सरसाये,

घूमें वे इस ओर वहाँ, ये हंस यहाँ उड़ छाये।

करके ध्यान आज इस जन का निश्चय वे मुसकाये,

फूल उठे हैं कमल, अधर से यह बन्धूक सुहाये।

स्वागत, स्वागत, शरद भाग्य से मैंने दर्शन पाये,

नभ ने मोती वारे, लो, ये अश्रु अर्घ्य भर लाये।

  1. प्रस्तुत पद्यांश किस शीर्षक कविता से लिया गया है, इसके रचयिता कौन हैं?

उत्तर-    प्रस्तुत पद्यांश ‘साकेत’ महाकाव्य के नवम् सर्ग से हमारी पाठ्य- पुस्तक में संकलित ‘गीत’ शीर्षक कविता से उद्धृत है और इसके रचयिता ‘मैथिलीशरण    गुप्त’ हैं।

  1. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-     रेखांकित अंश की व्याख्या- (क) विरहिणी उर्मिला कहती है कि चारों ओर धूप के रूप में प्रियतम के शरीर की (तपस्या के कारण उत्पन्न) गर्मी फैली हुई है और उनके मन की सरसता और स्निग्धता के कारण सरोवर कमल के फूलों से खिल उठे हैं अर्थात् कमलों से भरे सरोवर को देखकर मेरा मन ऐसा प्रसन्न हो उठा है मानों उसे प्रियतम के सरस-स्निग्ध शरीर की समीपता प्राप्त हो गई है।

(ख)      विरहिणी उर्मिला शरद ऋतु का स्वागत करती हुई कह रही है कि आकाश ने तुम्हारे स्वागत में ओस की बूँदों के रूप में असंख्य मोती न्योछावर किये हैं, तो मेरे ये नेत्र तुम्हारे स्वागत के लिए आँसू रूपी अर्घ्य लेकर प्रस्तुत हैं।

  1. ‘हंस के उड़कर आने में’ वियोगिनी क्या आभास कर रही है?

उत्तर-    हंस के उड़कर आने में वियोगिनी उर्मिला को वन में प्रियतम के घूमने का आभास हो रहा है।

  1. ‘फेरे उन मेरे रंजन ने’ रंजन किसका संबोधन है?

उत्तर-    रंजन शब्द प्रियतम का संबोधन है।

  1. पूरे पद्यांश में कौन किसके लिए कह रहा है?

उत्तर-    प्रस्तुत पद्यांश में वियोगिनी उर्मिला शरद-ऋतु के आगमन के बहाने अपने प्रियतम के लिए कह रही है।

  1. सखी को खंजन दिखाने का तात्पर्य क्या है?

उत्तर-    सखी को खंजन पक्षी को दिखाने का तात्पर्य यह है कि विरहिणी उर्मिला को ऐसा लगता है, जैसे आनन्द देने वाले प्रियतम ने इन खंजन पक्षियों के रूप में मुझे सुन्दर लगने वाले अपने नेत्र मेरी ओर घुमा दिये हैं।

  1. हंसों को उड़कर यहाँ आने का क्या कारण है?

उत्तर-     हंसों का उड़कर यहाँ आने का कारण यह है कि वहाँ वन में मेरे प्रियतम घूम रहे होंगे और उस मन्द-मन्द गति का स्मरण दिलाने के लिए ही ये हंस यहाँ उड़कर आ गये हैं।

  1. ‘नयन’ और ‘कमल’ शब्द का एक-एक पर्यायवाची लिखिए।

उत्तर-    ‘नयन’ का पर्यायवाची ‘नेत्र’ और ‘कमल’ का पर्यायवाची ‘पंकज’ है।

  1. इस काव्यांश में किस ऋतु का वर्णन है

उत्तर-    प्रस्तुत काव्यांश में शरद ऋतु का वर्णन है।

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