UP Board Solution of Class 9 Hindi Chapter -8–– Unhe pranam – Sohanlal Dvivedi – पाठ – 8 सोहन लाल द्विवेदी -उन्हें प्रणाम (काव्य खंड) sohan lal- unhen pranam – प्रश्न -उत्तर Padyansh ke Prashn Uttar-gyansindhuclasses

UP Board Solution of Class 9 Hindi Chapter -8–– Unhe pranam – Sohanlal Dvivedi – पाठ – 8 सोहन लाल द्विवेदी -उन्हें प्रणाम  (काव्य खंड) sohan lal- unhen pranam – प्रश्न -उत्तर Padyansh ke Prashn Uttar-gyansindhuclasses

Chapter -8–– Unhe pranam

UP Board Solution of Class 9 Hindi Chapter -8–– Unhe pranam – Sohanlal Dvivedi – पाठ – 8 सोहन लाल द्विवेदी -उन्हें प्रणाम  (काव्य खंड) sohan lal- unhen pranam – प्रश्न -उत्तर Padyansh ke Prashn Uttar-gyansindhuclasses – based on up board syllabus for new session.

चैप्टर 8. सोहनलाल द्विवेदी पद्यांश आधारित प्रश्न उत्तर

 

प्रश्न 1. निम्नांकित पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) भेद गया है दीन – अश्रु से जिनका मर्म,

       मुहताजों के साथ न जिनको आती शर्म,

       किसी देश में किसी वेश में करते कर्म,

       मानवता का संस्थापन ही हैं जिनका धर्म ।

               ज्ञात नहीं है जिनके नाम ।

               उन्हें प्रणाम ! सतत प्रणाम !

प्रश्न- (i)प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने किस प्रकार के पुरुषों को प्रणाम किया है ?

उत्तर- (i) कवि ऐसे अज्ञात नाम वाले महापुरुषों को प्रणाम किया हैं, जो सदैव दीन-दुःखियों के सहयोगी बन मानवता के उपासक रहे हैं।

प्र.(ii) मानवता की स्थापना को कौन अपना सच्चा धर्म समझता है ?

उ.वे महापुरुष जो निरन्तर दीन दुःखियों के साथ रहते हैं। निर्धन दलितों के साथ रहते तनिक भी लज्जा का अनुभव नहीं करते एवं सदैव कर्म में लीन रहते हैं, ऐसे महापुरुष मानवता को ही अपना धर्म समझते हैं।

प्र.(iii) प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?

उ. प्रस्तुत पंक्तियों में अनुप्रास एवं पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है

 

(ख) कोटि-कोटि नंगों, भिखमंगों के जो साथ,

       खड़े हुए हैं कंधा जोड़े, उन्नत माथ,

       शोषित जन के, पीड़ित जन के, कर को थाम,

       बढ़े जा रहे उधर जिधर है मुक्ति प्रकाम !

       ज्ञात और अज्ञात मात्र ही जिनके नाम !

       वन्दनीय उन सत्पुरुषों को सतत प्रणाम !

प्रश्न- (i) प्रस्तुत कविता का सन्दर्भ लिखिए ।

उत्तर- (i) प्रस्तुत पद्यांश सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित ‘उन्हें प्रणाम’ शीर्षक कविता से उद्धृत है।

प्र.(ii) कवि किस प्रकार के सद्पुरुषों को नमन कर रहा है ?

उ.जो शोषित और सताए हुए लोगों के हाथों को पकड़कर स्वच्छता एवं स्वतंत्रता की तरफ लाते हैं ऐसे ज्ञात एवं अज्ञात नाम वाले सत्पुरुष को मेरा प्रणाम है।

प्र.(iii) दलितों के साथ रहकर लज्जा का अनुभव कौन नहीं करता है?

उ. जो सत्पुरुष लोग हैं वे दलितों के साथ रहकर लज्जा का अनुभव नहीं करते हैं।

 

(ग) जिनके गीतों के पढ़ने से मिलती शान्ति,

     जिनकी तानों के सुनने से झिलती भ्रान्ति,

     छा जाती मुखमण्डल पर यौवन की कान्ति,

     जिनकी टेकों पर टिकने से टिकती क्रान्ति ।

     मरण मधुर बन जाता जैसे वरदान,

     अधरों पर खिल जाती है मादक मुस्कान,

     नहीं देख सकते जग में अन्याय वितान,

     प्राण उच्छ्वसित होते, होने को बलिदान ।

     जो घावों पर मरहम का कर देते काम !

     उन सहृदय हृदयों को मेरे कोटि प्रणाम !

प्रश्न- (i) द्विवेदी जी किस प्रकार के गीतकारों की प्रशंसा कर रहे

उत्तर- (i) कवि उन गीतकारों की प्रशंसा कर रहा है जिनके गीत जनसाधारण के हृदयों को शान्ति, उत्साह एवं बलिदानी भावना प्रदान करते हैं।

प्र.(ii) प्रस्तुत काव्य पंक्तियों में कवि ने क्या संदेश दिया है ?

उ. कवि ने समाज के पीड़ित व्यक्तियों की सेवा करने का सन्देश भी दिया है।

प्र.(iii) प्रस्तुत पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

उ. प्रस्तुत पद्यांश सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित ‘उन्हें प्रणाम’ शीर्षक कविता से उद्धृत है।

Chapter -8–– Unhe pranam

(घ) उन्हें जिन्हें है नहीं जगत में अपना काम,

      राजा से बन गये भिखारी तज आराम,

      दर-दर भीख माँगते सहते वर्षा घाम

      दो सूखी मधुकरियाँ दे देतीं विश्राम !

      जिनकी आत्मा सदा सत्य का करती शोध,

      जिनको है अपनी गौरव गरिमा का बोध,

      जिन्हें दुखी पर दया क्रूर पर आता क्रोध

      अत्याचारों का अभीष्ट जिनको प्रतिशोध !

                        उन्हें प्रणाम ! सतत प्रणाम !

 प्रश्न- (i) दुःखियों के हृदयों को सांत्वना देकर कौन सुखी बनाता है?

उत्तर- (i) दुःखियों के हृदयों को सांत्वना देकर सच्चे जनसेवक उन्हें सुखी बनाते हैं।

प्र.(ii) देश में जो अज्ञात महापुरुष हैं, उनकी प्रमुख विशेषता क्या है?

उ.देश में अज्ञात नाम वाले महापुरुष हैं वे दीन दुःखियों के घाव पर मरहम लगाने का कार्य करते हैं जो दीन दुःखियों की सेवा में निरन्तर लगे रहते हैं।

प्र.(iii) प्रस्तुत काव्य पंक्तियों में किसके लिए प्रेरणा दी गयी है?

उ. प्रस्तुत काव्य पंक्तियों में दीन दुःखियों की सेवा तथा अन्याय के प्रतिकार हेतु प्रेरणा दी गयी है।

 

(ङ) मातृभूमि का जगा जिन्हें ऐसा अनुराग !

      यौवन में ही लिया जिन्होंने है वैराग,

      नगर – नगर की ग्राम ग्राम की छानी धूल

      समझे जिससे सोई. जनता अपनी भूल !

      जिनको रोटी नमक न होता कभी नसीब,

      जिनको युग ने बना रखा है सदा गरीब,

      उन मूर्खों को विद्वानों को जो दिन-रात,

      इन्हें जगाने को फेरी देते हैं प्रात;

      जगा रहे जो सोए गौरव को अभिराम ।

प्रश्न- (i) प्रस्तुत कविता का सन्दर्भ लिखिए।

उत्तर- (i) प्रस्तुत काव्य-पंक्तियाँ सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित ‘उन्हें प्रणाम’ शीर्षक कविता से उद्धृत है।

प्र.(ii) कवि किस प्रकार के महापुरुषों को नमन कर रहा है?

उ. कवि ने देशभक्तों एवं क्रान्तिकारियों को नमन किया है।

प्र.(iii) जनता को जगाने के लिए किस प्रकार के लोग नगर और गाँव की धूल छान मारी ?

उ.राष्ट्रभक्तों ने अज्ञान में पड़ी हुई जनता को उसकी भूल का अनुभव कराने के लिए प्रत्येक नगर और गाँव की धूल छान मारी अर्थात् प्रत्येक गाँव और नगर में चेतना जागृत करने के लिए घूमे।

Chapter -8–– Unhe pranam

(च) जंजीरों में कसे हुए सीकचों के पार

      जन्मभूमि जननी की करते जय-जयकार

      सही कठिन, हथकड़ियों की बेतों की मार

      आजादी की कभी न छोड़ी टेक पुकार !

       स्वार्थ, लोभ, यश कभी सका है जिन्हें न जीत

       जो अपनी धुन के मतवाले मन’ के मीत

        ढाने को साम्राज्यवाद की दृढ़ दीवार

        बार-बार बलिदान चढ़े प्राणों को वार!

        बंद सीकचों में जो हैं अपने सरनाम

         धीर, वीर उन सत्पुरुषों को कोटि प्रणाम !

         उन्हीं कर्मठों, ध्रुव धीरों को है प्रतियाम!

                                          कोटि प्रणाम !

प्रश्न-(i) प्रस्तुत कविता का सन्दर्भ लिखिए ।

उत्तर-(i) प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित ‘स्वदेश प्रेम’ कविता से उद्धृत हैं।

प्र.(ii) प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने किन्हें नमन किया है ?

उ. सोहनलाल द्विवेदी जी ने जेल की यातनाएँ सहकर भी अपने लक्ष्य से न भटकने वाले धीर वीरों को नमन किया है।

प्र.(iii) स्वतन्त्रता सेनानियों की असली धुन क्या थी ?

उ. स्वतन्त्रता सेनानियों की केवल एक ही धुन थी कि हमारा देश स्वतन्त्र हो ।

 

(छ) जो फाँसी के तख्तों पर जाते हैं झूम,

      जो हँसते-हँसते शूली को लेते चूम,

      दीवारों में चुन जाते हैं जो मासूम,

      टेक न तजते, पी जाते हैं विष का धूम!

      उस आगत को जो कि अनागत दिव्य भविष्य

      जिनकी पावन ज्वाला में सब पाप हविष्य !

      सब स्वतन्त्र, सब सुखी जहाँ पर सुख विश्राम

      नवयुग के उस नव प्रभात की किरण ललाम ।

      उस मंगलमय दिन को मेरे कोटि प्रणाम!

      सर्वोदय हँस रहा जहाँ, सुख-शान्ति प्रकाम !

प्रश्न- (i) गुरु गोविन्द सिंह के दोनों मासूम वीर बालकों को किसने दीवार में चिनवा दिया था?

उत्तर- (i) गुरु गोविन्द सिंह के वे दोनों मासूम वीर बालक को औरंगजेब ने दीवार में चिनवा दिया था।

प्र.(ii) प्रस्तुत काव्य-पंक्तियों में कवि किस प्रकार के स्वतंत्रता सेनानियों को नमन कर रहा है।

प्र.प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने देश में सुख-चैन लाने वाले वीर बलिदानी सेनानियों को नमन किया है।

प्र.(iii) स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानियों के बलिदान का क्या परिणाम होगा?

उ.स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानियों के बलिदान का परिणाम यह हुआ कि लोगों का कल्याण हुआ और लोग सुखपूर्वक रहने लगे।

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