क्यों शोक मनाता भाई है? (अरुनेश ‘अरुन’)
KYON SHOK MANATA BHAI HAI?
Best Hindi Motivational Poem – KYON SHOK MANATA BHAI HAI? – Inpirational Hindi Kavita क्यों शोक मनाता भाई है?
क्यों शोक मनाता भाई है।
क्यों शोक मनाता भाई है।
जो रूठ गया सो रूठ गया
जो छूट गया सो छूट गया
तरुवर टूटे पत्तों पर क्या
शोक में रोते देखा है
या कभी बादलों से घिर कर
दिन रजनी होते देखा है
दो चार केश पकने से क्या
हम खो देते तरुणाई है
क्यों शोक मनाता भाई है।
क्यों शोक मनाता भाई है।
दो चार सपन तो टूट गए
पर आशा अभी नहीं टूटी
संघर्ष हमारा जारी है
अभिलाषा अभी नहीं टूटी
नदियों की सीमाएं होती
पर कभी समंदर बनती है
कोई लाख गागरें भर लें तो
क्या लाई कभी रुलाई हैं
क्यों शोक मनाता भाई है।
क्यों शोक मनाता भाई है।
कांटों के बीच गुलाब खिले
हिलने से डाली बदन छिले
खिलने से कहाँ रुका वह भी
पा जाये तो सौ बार खिले।
जब बीज धरा के अंदर हो
अंधियार, नमी, ऊष्मा, सहता
पर कभी एक दिन अंकुर बन
धरती की छाती पर रहता
चिड़िया तिनकों को जोड़-जोड़
करती तैयार अपना प्रिय घर
क्या सोच बवंडर का आना
हतभाग्य सोंच रुकपाई है।
क्यों शोक मनाता भाई है।
क्यों शोक मनाता भाई है।
सूख गई जो फसल कृषक की
तो क्या सूखा बाधा बनता
फिर से बीज डालता है वह
सीना ताने कभी न थमता
हर शाम डूबता सूरज है
हर रोज़ सबेरे मुस्काता
तारा दिन में छिप जाता है
हर रोज़ रात को है गाता
सूरज चन्दा या तारों की क्या
आँख कभी नम पाई है
क्यों शोक मनाता भाई है।
क्यों शोक मनाता भाई है।
अरुनेश ‘अरुन’ के बारे में
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