UP Board Class 10 sanskrit Katha Natak Kaumudi- Chapter –2 द्वितीय: पाठ: 2- कारुणिको जीमूतवाहनः Karuniko Jimutvahan – चरित्र चित्रण एवं प्रश्नोत्तर (बहुविकल्पीय प्रश्न- MCQs)
प्रिय विद्यार्थियों! यहाँ पर हम आपको कक्षा 10 यूपी बोर्ड संस्कृत कथा नाटक कौमुदी के chapter 2 द्वितीय: पाठ: कारुणिको जीमूतवाहनः के सभी पत्रों के चरित्र चित्रण, लघु उत्तरीय संस्कृत में प्रश्न उत्तर तथा बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर – MCQs प्रदान कर रहे हैं। आशा है आपको अच्छा ज्ञान प्राप्त होगा और आप दूसरों को भी शेयर करेंगे।
Subject / विषय | संस्कृत (Sanskrit) कथा नाटक कौमुदी |
Class / कक्षा | 10th |
Chapter( Lesson) / पाठ | Chpter -2 |
Topic / टॉपिक | द्वितीय: पाठ: 2- कारुणिको जीमूतवाहनः |
Chapter Name | Karuniko jeemutvaahan |
All Chapters/ सम्पूर्ण पाठ्यक्रम | कम्पलीट संस्कृत बुक सलूशन |
कारुणिको जीमूतवाहन: – जीमूतवाहन का चरित्र चित्रण
परिचय- जीमूतवाहन, पाठ के आधार पर जीमूतकेतु का पुत्र है। वह विद्याधर जाति का है। उसकी पत्नी का नाम मलयवती है। जीमूतवाहन परोपकारी, दयालु, माता-पिता का भक्त और असाधारण व्यक्तित्व वाला विद्याधर है। पाठ के आधार पर जीमूतवाहन के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
विनम्र स्वभाव- जीमूतवाहन का स्वभाव विनम्र है। विनयशीलता उसके स्वभाव में कूट-कूट कर भरी हुई है। वह सभी के साथ सद् एवं विनम्र व्यवहार करता है। वह अपने व्यवहार से किसी को भी किसी प्रकार की पीड़ा पहुँचाना उचित नहीं समझता है।
महान् त्यागशील- जीमूतवाहन का जीवन त्याग से परिपूर्ण है। गरुड़ के भोजन के लिए जब शर्तानुसार शंखचूड़ नामक सर्प की बारी आती है, तो शंखचूड़ की माता के करुण विलाप को सुनकर जीमूतवाहन अपने प्राणों की चिन्ता किए बिना लाल वस्त्र धारण कर स्वयं वधस्थल पर चला जाता है। इससे उसके त्यागमयी जीवन का परिचय मिलता है।
निर्भीक व साहसी– जीमूतवाहन निर्भीक व साहसी व्यक्तित्व से परिपूर्ण है। वह गरुड़ के भोजन के लिए स्वयं को प्रस्तुत करने पर भी भयभीत नहीं होता। गरुड़ के आक्रमण से आहत होने पर भी वह स्वयं गरुड़ से अपने रक्त व मांस का भोजन करने के लिए कहकर अपनी निर्भीकता व अतुलित साहस का परिचय देता है।
मातृ-पितृभक्त – जीमूतवाहन मातृ-पितृभक्त है। माता-पिता के वधस्थल पर आगमन की सूचना शंखचूड़ से अपने शरीर को ढकने के लिए कहता है, क्योंकि वह उनकी व्यथा से व्याकुल हो जाता है। इस करुणावस्था में भी वह उनके अभिवादन के लिए उठकर अपनी मातृ-पितृभक्ति का परिचय देता है।
दयालु स्वभाव- जीमूतवाहन दयालु स्वभाव वाला व्यक्ति है। दूसरों की पीड़ा व कष्टों को देखकर उसका हृदय द्रवित हो उठता है, इसीलिए शंखचूड़ के प्राणों की रक्षा करने के लिए वह अपने प्राणों की बाजी लगा देता है।
प्रभावशाली व्यक्तित्व – जीमूतवाहन प्रभावशाली युवक है। उसके त्यागमयी व्यक्तित्व से शंखचूड़, गरुड़ व पार्वती भी प्रभावित हो जाती हैं। परिणामस्वरूप, हिंसक गरुड़ भी अहिंसक बन जाता है। समग्रतः हम कह सकते हैं कि जीमूतवाहन त्यागी, विनम्रशील, निर्भीक, मातृ-पितृभक्त, दयालु व प्रभावशाली व्यक्तित्व से परिपूर्ण है।
शंखचूड़ का चरित्र चित्रण
परिचय– शंखचूड़ एक सर्प है। सर्पराज वासुकि के शर्तानुसार उसे गरुड़ के भोजन के लिए उसके पास भेजा जाता है। पाठ के आधार पर शंखचूड़ के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं
सत्यवादी- शंखचूड़ सत्यता से परिपूर्ण है। वह जीमूतवाहन के माता-पिता को समस्त घटना से परिचित कराता है। वह अपने प्राणों की चिन्ता किए बिना गरुड़ के सम्मुख भी जीमूतवाहन का परिचय कराते हुए, अपनी सत्यता का परिचय देता है।
दयालु स्वभाव – शंखचूड़ दया से युक्त है। वह जीमूतवाहन के माता-पिता व पत्नी के करुण विलाप को देखकर द्रवित हो उठता है और स्वयं को धिक्कारने लगता है।
बुद्धिमान- शंखचूड़ बुद्धिमान है। वह जीमूतवाहन के माता-पिता को आश्वासन दिलाता है कि जीमूतवाहन सर्प नहीं है, शायद गरुड़ ने उसे अपना भोजन न बनाया होगा और वह इसी तर्कानुसार रक्त चिह्नों का अनुसरण करते हुए जीमूतवाहन की खोज करता है।
निर्भीक स्वभाव- शंखचूड़ निर्भीक स्वभाव का सर्प है। वह गरुड़ के पास जाकर स्वयं को अपना भोजन बनाने की बात कहता है और जीमूतवाहन के प्राणों को बचाना चाहता है।
आशावादी – शंखचूड़ आशावादी है। वह आशा रखता है कि जीमूतवाहन सर्प नहीं है, इसीलिए गरुड़ ने उसे अपना भोजन नहीं बनाया होगा। इसी आशा के कारण वह रक्त चिह्नों के माध्यम से जीमूतवाहन तक पहुँच जाता है। संक्षेप में हम कह सकते हैं कि शंखचूड़ एक सत्यवादी, बुद्धिमान, निर्भीक व आशा से परिपूर्ण गुणग्राही सर्प है।
कारुणिको जीमूतवाहनः – बहुविकल्पीय प्रश्न- MCQs
निम्न चार विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए –
1. जीमूतवाहनः पुत्रः आसीत्-
अथवा, जीमूतवाहनस्य पिता………………… आसीत् ।
(क) श्वेतकेतोः
(ख) जीमूतकेतोः ✔
(ग) शङ्खचूडस्य
(घ) गरुडस्य
2. शङ्खचूडः………………….आसीत्।
(क) नागः ✔
(ख) देवः
(ग) दनुजः
(घ) मानवः
3. नागानन्दस्य नाटकस्य रचयिता……. “अस्ति।
(क) हर्षवर्धनः ✔
(ख) कालिदासः
(ग) भवभूतिः
(घ) विशाखदत्तः
4. गरुडेन व्यापादितः –
(क) जीमूतवाहनः ✔
(ख) शङ्खचूडः
(ग) जीमूतकेतुः
(घ) सर्वाः
5. जीमूतवाहनस्य पिता………………आसीत् ।
(क) शंखचूडः
(ख) मलयकेतुः
(ग) जीमूतकेतुः ✔
(घ) सत्यकेतुः
6. विद्याधरः रक्षां करोति ?
(क) गरुडस्य
(ख) शङ्खचूडस्य ✔
(ग) वासुके:
(घ) जीमूतकेतोः
7. विद्याधरेण केनापि आविष्ट चेतसा ।
(क) क्रोधः
(ख) पीड़ा
(ग) करुणा ✔
(घ) भय
कारुणिको जीमूतवाहनः – अति लघु उत्तरीय संस्कृत प्रश्न
प्रश्न 1. : जीमूतवाहनस्य वार्त्तामन्वेष्टुं महाराज विश्वावसुना प्रतिहारः कुत्र प्रेषितः ?
उत्तर : महाराज विश्वावसुना जीमूतकेतोः समीपं प्रतिहारः प्रेषितः ।
प्रश्न 2. : जीमूतवाहनस्य पितुः किम् नाम्?
उत्तर : जीमूतवाहनस्य पितुः नाम् जीमूतकेतुः आसीत् ।
प्रश्न 3. : शङ्खचूडः कः आसीत्?
उत्तर : शङ्खचूडः एकः नागः आसीत्।
प्रश्न 4. : जीमूतवाहनः फणिनः प्राणान् परिरक्षितुं किम् अकरोत्?
उत्तर : स गरुडस्य आहारार्थ स्व शरीरं दत्तवान्।
प्रश्न 5. : गरुडेन कः व्यापादितः?
अथवा जीमूतवाहनः केन व्यापादितः ।
उत्तर : गरुडेन जीमूतवाहनः व्यापादितः ।
प्रश्न 6. : जीमूतवाहनः कथं प्रत्युज्जीवितः कृतः?
उत्तर : भगवत्या गौर्या स्वकमण्डलु जलेन अभिषिच्य प्रत्युज्जीवितः ।
प्रश्न 7. : अनभ्रा वृष्टिः कथम् अभवत् ?
उत्तर : जीमूतवाहनं पूर्व खादितान् नागान् च उज्जीवयितुं गरुडेन, अमृत वर्षाः कृता।
प्रश्न 8. : जीमूतवाहनः कस्य पुत्रः आसीत्?
अथवा जीमूतवाहनस्य पिताः कः आसीत्?
उत्तर : जीमूतवाहनः जीमूतकेतोः पुत्रः आसीत् ।